दोहरी सियासत का शिकार फ़िलिस्तीन
“श्वेत पर्दे पर श्याम और उनकी ‘सुसमन ’ (The Essence)
पोस्ट ट्रुथ के दौर में युवाओं (जेन Z) के आंदोलन : कुछ सवाल, कुछ जवाब
सतीश सरदाना का कहानी-संग्रह ‘चोखा दाम’ मनुष्य, बाज़ार और स्मृति
बापू टावर में सवर्ण वर्चस्व का नंगा नाच
लोक से विश्व तक गूंजती छत्तीसगढ़ की धड़कन अब खामोश: तीजन बाई
हँसना है तो थोड़ा रो लें: मैं वापस आऊंगा’
सूखा नशा
राहुल गांधी,कांग्रेस की परंपरा और INDIA गठबंधन का असहज भविष्य
कवि कभी मरता नहीं, वह अपनी रचनाओं में जीवित रहता है
ओटीटी और भारतीय समाज की बदलती ‘दर्शक संस्कृति’
‘सोनिया और राजीव’ ‘मेलोनी और मोदी’
‘प्रगतिशील सिनेमा’ प्रेमचंद का अधूरा सपना