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आधुनिक भारत में महिलाओं की भूमिका : परिवर्तन, उपलब्धियाँ और चुनौतियाँ

  अहमद आली शोध सार— भारतीय समाज अपने सुदीर्घ इतिहास में अनेक सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक परिवर्तनों का साक्षी रहा है, किंतु इन परिवर्तनों के बीच...

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नारे, प्रतिरोध और मज़ा-मज़ाक

प्रतिरोध में गढ़े गए जिन नारों का विस्तार हमें फेसबुक पर दिखाई पड़ रहा है क्या सचमुच क्रिएटिव माना जाना चाहिए? बात वैसे...

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नारे, प्रतिरोध और मज़ा-मज़ाक

प्रतिरोध में गढ़े गए जिन नारों का विस्तार हमें फेसबुक पर दिखाई पड़ रहा है क्या सचमुच क्रिएटिव माना जाना चाहिए? बात वैसे...
ISSN 2394-093X
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समसामयिकी

नारे, प्रतिरोध और मज़ा-मज़ाक

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बाबू जगदेव प्रसाद की राजनीति: भाषा, प्रतीक और मुद्दे

जगदेव प्रसाद ने उत्तर भारत में ‘सामाजिक-सांस्कृतिक क्रान्ति’ के प्रस्तावक के रूप में भारतीय समाज की एक ऐसी नींव को मजबूत किया जो कृषि और आग पर आधारित संस्कृति को प्रवाहित करती है। बहुजन-श्रमण संस्कृति को बहाव की धारा में लाया जा सकता है, जो कृषि, आग, प्रेम और परिश्रम पर आधारित है, न कि नफ़रत, ढकोसलेबाजी और शोषण पर।

शिवम् अवस्थी की कविताएँ और ग़ज़ल

1.तुम बताओ...मौन के इन मोतियों में, गूँजते हैं साज़ कितने?इन झुकी सी पलकों के, अक्स में परवाज़ कितने?तुम बताओ हैं तुम्हारी, ज़िंदगी में स्वप्न...

‘द सेकंड सोच’: कटी हुई जुबानों के बीच सच का परचम

मीरा के पदों को तत्कालीन रूढ़िग्रस्त समाज से मिले अनादर और कड़वे बोलों ने मधुर बना दिया। जितनी गहरी वेदना एवं पीड़ा, उतनी ही...

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