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1.तुम बताओ...मौन के इन मोतियों में, गूँजते हैं साज़ कितने?इन झुकी सी पलकों के, अक्स में परवाज़ कितने?तुम बताओ हैं तुम्हारी, ज़िंदगी में स्वप्न...

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बाबू जगदेव प्रसाद की राजनीति: भाषा, प्रतीक और मुद्दे

जगदेव प्रसाद ने उत्तर भारत में ‘सामाजिक-सांस्कृतिक क्रान्ति’ के प्रस्तावक के रूप में भारतीय समाज की एक ऐसी नींव को मजबूत किया जो कृषि और आग पर आधारित संस्कृति को प्रवाहित करती है। बहुजन-श्रमण संस्कृति को बहाव की धारा में लाया जा सकता है, जो कृषि, आग, प्रेम और परिश्रम पर आधारित है, न कि नफ़रत, ढकोसलेबाजी और शोषण पर।

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ISSN 2394-093X
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