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‘प्रगतिशील सिनेमा’ प्रेमचंद का अधूरा सपना

प्रेमचंद जयंती पर विशेष मानव केंद्रित नवजागरण काल में जबकि साहित्य प्रगतिशीलता की ओर बढ़ रहा था उसी समयकाल में धर्म-केंद्रित, चमत्कारपूर्ण और चमकीले-अश्लील...

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सतीश सरदाना का कहानी-संग्रह ‘चोखा दाम’ मनुष्य, बाज़ार और स्मृति

समकालीन हिंदी कहानी का एक बड़ा संकट यह है कि वह कई बार अपने समय के शोर में मनुष्य की धीमी आवाज़ खो देती...

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सतीश सरदाना का कहानी-संग्रह ‘चोखा दाम’ मनुष्य, बाज़ार और स्मृति

समकालीन हिंदी कहानी का एक बड़ा संकट यह है कि वह कई बार अपने समय के शोर में मनुष्य की धीमी आवाज़ खो देती...
ISSN 2394-093X
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सतीश सरदाना का कहानी-संग्रह ‘चोखा दाम’ मनुष्य, बाज़ार और स्मृति

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‘द वायस ऑफ़ हिन्द रजब’

आपको बता दें कि ऑस्कर में नामांकित होने पर कॉल सेंटर ऑपरेटरकी भूमिका निभाने वाले मोताज मालहीज़ इन्स्टाग्राम पर लिखते हैं कि “मुझे फ़िलिस्तीनी...

गद्य काव्य रचना त्रयी

भाग (1): संकल्प  (  जवाब.. ) ​" काफ़ी  समय  बाद  कुछ  ख़ाली  हुआ  हूँ  ख़ुद के लिए ...." ​यह भी  वर्तमान का सच है, कि तुम्हें पता  चला...

फूलमती का वसंत ऋतु

कहानी : श्यामत भट्टाचार्य                                अनुवाद : कुमार शाश्वत कोयल के लिए...

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