आजादी के आंदोलन में आम लोगों की हिस्सेदारी रेखांकित करना: नाटक
आवाज़
‘सोनिया और राजीव’ ‘मेलोनी और मोदी’
सांस्कृतिक राष्ट्रवाद नहीं, लोकतान्त्रिक राष्ट्रवाद को मजबूत करने की जरूरत है: अनिता भारती
शिवनंदन पासवान को क्यों भुला दिया गया : जननायक कर्पूरी ठाकुर को दिया था ‘मरणोपरांत न्याय’ !
समाज, संस्कृति और पितृसत्ता से ‘जूली’ का संघर्ष
जगजीवन राम और उनका नेतृत्व पुस्तक सामाजिक संस्कारों में विन्यस्त करने को प्रेरित करती है
रांची में अगस्त की वो रातें जब लोगों के सिर पर सवार था खून… HEC में बन रहे थे चाकू, खंजर और भाला..
भारतीय महिलाओं के अधिकार: अतीत से वर्तमान तक की यात्रा
सत्यजीत राय के वाजिद अली शाह
क्या एक मिथ (फातिमा शेख) के बरक्स सच कहना साम्प्रदायिकता है ?
गिद्ध संस्कृति के विरुद्ध गौरैया की गुहार
स्त्री भागीदारी पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी: उपलब्धियों के साथ नई चुनौतियों पर जोर