लोक से विश्व तक गूंजती छत्तीसगढ़ की धड़कन अब खामोश: तीजन बाई
रीतिकालीन कविता और स्त्री यौनिकता विमर्श
हँसना है तो थोड़ा रो लें: मैं वापस आऊंगा’
“भक्तिकालीन हिंदी साहित्य में स्त्री-अस्मिता कीअभिव्यक्ति : एक आलोचनात्मक अध्ययन”
ऑब्जेक्टिव प्रश्न से आत्मबोध तक : बाबासाहेब की खोज
आजादी के आंदोलन में आम लोगों की हिस्सेदारी रेखांकित करना: नाटक
‘सोनिया और राजीव’ ‘मेलोनी और मोदी’
इमाम आयतुल्लाह ख़ामेनेई से नासिरा शर्मा का साक्षात्कार
हंस ब्राह्मणवाद के यम ही नहीं,डाइवर्सिटी आंदोलन के स्तम्भ भी रहे!
शिवनंदन पासवान को क्यों भुला दिया गया : जननायक कर्पूरी ठाकुर को दिया था ‘मरणोपरांत न्याय’ !
समाज, संस्कृति और पितृसत्ता से ‘जूली’ का संघर्ष
जगजीवन राम और उनका नेतृत्व पुस्तक सामाजिक संस्कारों में विन्यस्त करने को प्रेरित करती है
सूखा नशा