फ़िलिस्तीन : एक नया कर्बला – नासिरा शर्मा
पूर्ण लोकतंत्र की स्थापना : एक किताब,एक पहल
बच्चों की क़त्लगाह ग़ाज़ा पट्टी
रीतिकालीन कविता और स्त्री यौनिकता विमर्श
हँसना है तो थोड़ा रो लें: मैं वापस आऊंगा’
“भक्तिकालीन हिंदी साहित्य में स्त्री-अस्मिता कीअभिव्यक्ति : एक आलोचनात्मक अध्ययन”
नाच एक संवेदनशील उपन्यास
ऑब्जेक्टिव प्रश्न से आत्मबोध तक : बाबासाहेब की खोज
आजादी के आंदोलन में आम लोगों की हिस्सेदारी रेखांकित करना: नाटक
‘सोनिया और राजीव’ ‘मेलोनी और मोदी’
इमाम आयतुल्लाह ख़ामेनेई से नासिरा शर्मा का साक्षात्कार
दोहरी सियासत का शिकार फ़िलिस्तीन