‘रजत रानी मीनू’ की कविताओं में स्त्री – रुपक कुमार
नीतिशा खलखो की कविताएं
‘गूज बम्प्स’
बेटी दिवस पर विशेष : संजना तिवारी की कविताएं
धारा 377 की मौत और पितृसत्तात्मक विमर्श पद्धति
आदिवासी बच्चों के स्कूल बंद कर रही सरकार और लूट लिये आदिवासी मद के पैसे
‘विज्ञापनों में महिलाओं का प्रस्तुतीकरण:आर्थिक और सामाजिक परिप्रेक्ष्य’
भगवान! ‘एक कटोरा भात खिला दो बस, भारत में भात नहीं मिला’
दो लाख ले लो और मेरा पति लौटा दो: महाराष्ट्र सरकार से किसान विधवायें
जन्मदिन पर झूठ, फर्जी जश्न और निर्दोषों का घर-बदर: क्या खूब मोदी जी!
मेधा पाटकर का सरकारी उत्पीड़न जारी
जीएसटी इम्पैक्ट: क्या महिलायें भेजेंगी वित्त मंत्री और प्रधानमंत्री को सैनिटरी पैड (!)
“मैं अभागा सुअर हूं”