लोक से विश्व तक गूंजती छत्तीसगढ़ की धड़कन अब खामोश: तीजन बाई
रीतिकालीन कविता और स्त्री यौनिकता विमर्श
हँसना है तो थोड़ा रो लें: मैं वापस आऊंगा’
“भक्तिकालीन हिंदी साहित्य में स्त्री-अस्मिता कीअभिव्यक्ति : एक आलोचनात्मक अध्ययन”
‘कुतों के रूपक’ में इंसानियत का प्रतिबिम्ब
राजेन्द्र सजल: एक कहानी सजग कहानीकार
मदर इंडिया: एक संघर्षरत भारतीय स्त्री की अमर कथा
हां मुझे फर्क पड़ता है…
कुछ अल्पविराम
इसलामपुर की शिक्षा-ज्योति कुन्ती देवी
भवसागर के उस पार मिलना पियारे हरिचंद ज्यू
अम्बेडकर की प्रासंगिकता के समकालीन बयान
सूखा नशा