दोहरी सियासत का शिकार फ़िलिस्तीन
“श्वेत पर्दे पर श्याम और उनकी ‘सुसमन ’ (The Essence)
पोस्ट ट्रुथ के दौर में युवाओं (जेन Z) के आंदोलन : कुछ सवाल, कुछ जवाब
सतीश सरदाना का कहानी-संग्रह ‘चोखा दाम’ मनुष्य, बाज़ार और स्मृति
सत्ता में भारतीय महिलाओं की उपस्थिति: सामर्थ्य, सीमाएँ एवं संभावनाएँ
ललदेद के वाखों में आत्मानुभूति, देह और ज्ञान की लोकमीमांसा : कश्मीरी शैव दर्शन, स्त्री-अनुभव और सांस्कृतिक चेतना का सैद्धांतिक पुनर्पाठ
महिलाओं के मुद्दे (लेनिन से क्लारा जेटकिन की बातचीत की आख़िरी क़िस्त)
सिवाय साम्यवाद के महिलाओं की मुक्ति संभव नहीं:लेनिन
कम्युनिस्ट महिलाओं, कामगार महिलाओं के विचार सर्वहारा की क्रांति पर ही केंद्रित होना चाहिए: लेनिन
भारतीय संतों के हमेशा कुंडलिनी जागरण की तरह हमेशा सेक्स की समस्याओं में उलझे रहने वालों पर भी मैं अविश्वास करता हूं: लेनिन
लेनिन: कम्युनिस्ट नेतृत्व महिलाओं के आन्दोलन के सवाल पर निराशावादी, रुको और देखो वाला रुख अपना लेता है
विष्णु जी, ब्राहमणवाद से हमारी लड़ाई जारी रहेगी !
‘प्रगतिशील सिनेमा’ प्रेमचंद का अधूरा सपना