लोक से विश्व तक गूंजती छत्तीसगढ़ की धड़कन अब खामोश: तीजन बाई
रीतिकालीन कविता और स्त्री यौनिकता विमर्श
हँसना है तो थोड़ा रो लें: मैं वापस आऊंगा’
“भक्तिकालीन हिंदी साहित्य में स्त्री-अस्मिता कीअभिव्यक्ति : एक आलोचनात्मक अध्ययन”
लड़की और चाँद
गीता मलिक की कविताएँ
कविता : “प्रकृति की पुकार”
पुस्तक समीक्षा: जिरहुल-जसिंता केरकेट्टा
वर्तमान के दो अंतहीन युद्ध
प्रज्ञा मिश्रा की कविताएं
गरिमा सिंह की कविताएं
अनुराधा ओस की कविताएँ
सूखा नशा