दोहरी सियासत का शिकार फ़िलिस्तीन
“श्वेत पर्दे पर श्याम और उनकी ‘सुसमन ’ (The Essence)
पोस्ट ट्रुथ के दौर में युवाओं (जेन Z) के आंदोलन : कुछ सवाल, कुछ जवाब
सतीश सरदाना का कहानी-संग्रह ‘चोखा दाम’ मनुष्य, बाज़ार और स्मृति
हँसना है तो थोड़ा रो लें: मैं वापस आऊंगा’
“भक्तिकालीन हिंदी साहित्य में स्त्री-अस्मिता कीअभिव्यक्ति : एक आलोचनात्मक अध्ययन”
सीवान की संस्कृति एवं कला
ओटीटी और भारतीय समाज की बदलती ‘दर्शक संस्कृति’
आजादी के आंदोलन में आम लोगों की हिस्सेदारी रेखांकित करना: नाटक
‘शतरंज’ की बिसात पर सोशल मीडिया ‘के खिलाड़ी’
स्वर की बहुरंगी विरासत और स्त्री-अभिव्यक्ति की स्वतंत्र आवाज़
हंस ब्राह्मणवाद के यम ही नहीं,डाइवर्सिटी आंदोलन के स्तम्भ भी रहे!
‘प्रगतिशील सिनेमा’ प्रेमचंद का अधूरा सपना