रीतिकालीन कविता और स्त्री यौनिकता विमर्श
हँसना है तो थोड़ा रो लें: मैं वापस आऊंगा’
“भक्तिकालीन हिंदी साहित्य में स्त्री-अस्मिता कीअभिव्यक्ति : एक आलोचनात्मक अध्ययन”
सूखा नशा
आजादी के आंदोलन में आम लोगों की हिस्सेदारी रेखांकित करना: नाटक
‘शतरंज’ की बिसात पर सोशल मीडिया ‘के खिलाड़ी’
स्वर की बहुरंगी विरासत और स्त्री-अभिव्यक्ति की स्वतंत्र आवाज़
हंस ब्राह्मणवाद के यम ही नहीं,डाइवर्सिटी आंदोलन के स्तम्भ भी रहे!
“धुरंधर” के लड़ाके
समाज, संस्कृति और पितृसत्ता से ‘जूली’ का संघर्ष
“स्पंदन सम्मान, 2025” फ़िल्म और रंगमंच में अभिनय के लिए विभा रानी को मिलेगा ‘ललित कला सम्मान’
क्यों विवादों में है बिहार सरकार का राजभाषा पुरस्कार
नाच एक संवेदनशील उपन्यास