गैंगस्टर माँ का साया और एक आज़ाद बेटी की परवाज़
परायों की गली में नितांत अकेला कुशवाहा सम्राट (चौधरी) !
प्रतीकों की लड़ाई: महिष दसरा, वर्चस्व का इतिहास और सत्ता का मौन
फिल्मों में स्त्री-भूमिका के प्रश्न “भूमिका” फ़िल्म के सन्दर्भ में
अस्ति कश्चित् वाग्विशेषः रामटेक पर दलित युवक
बेटी संज्ञा : बहू सर्वनाम
नरसंहारों का स्त्रीपक्ष
ताकि पीड़िताओं को बार –बार बलात्कार से न गुजरना पड़े
ताकि बलात्कार पीड़िताओं को बार –बार बलात्कार से न गुजरना पड़े
साहस का सौंदर्यशास्त्र गढ़ती नायिकाएं
सेलेब्रटिंग कैंसर
स्त्रीविमर्श में जाति, वर्ग और धार्मिक पहचान की महत्वपूर्ण भूमिका होनी चाहिए : नमिता सिंह
ऐतिहासिक और अमिट है समाजवाद की वैचारिक धारा वरसी जी स्मृति समारोह में वक्ताओं की राय