गैंगस्टर माँ का साया और एक आज़ाद बेटी की परवाज़
परायों की गली में नितांत अकेला कुशवाहा सम्राट (चौधरी) !
प्रतीकों की लड़ाई: महिष दसरा, वर्चस्व का इतिहास और सत्ता का मौन
फिल्मों में स्त्री-भूमिका के प्रश्न “भूमिका” फ़िल्म के सन्दर्भ में
बिहार और जातिवाद का इतिहास ‘दिनकर’ की कलम से:
डॉन्ट वरी डियर सोनम गुप्ता
सौ के नोट दिखाते लंपट और परेशान महिलायें
सुधार नहीं पूर्ण बदलाव चाहेंगी महिलायें
समानता के लिए जरूरी है महिला आरक्षण: सीताराम येचुरी
अपराधी बादशाह जो बन बैठा
पहली महिला राष्ट्रपति नहीं सेक्सिस्ट राष्ट्रपति: अमेरिकी जनादेश
नीतीश जी, आपकी पुलिस गालियाँ देती है और टार्चर करती है
ऐतिहासिक और अमिट है समाजवाद की वैचारिक धारा वरसी जी स्मृति समारोह में वक्ताओं की राय