गैंगस्टर माँ का साया और एक आज़ाद बेटी की परवाज़
परायों की गली में नितांत अकेला कुशवाहा सम्राट (चौधरी) !
प्रतीकों की लड़ाई: महिष दसरा, वर्चस्व का इतिहास और सत्ता का मौन
फिल्मों में स्त्री-भूमिका के प्रश्न “भूमिका” फ़िल्म के सन्दर्भ में
1990 के बाद का हिंदी समाज और अद्विज हिंदी लेखन
किस हाल में हैं बोधगया भूमि मुक्ति आन्दोलन की जमीन मालकिनें !
नये हिंदी सिनेमा में नयी स्त्री
समग्र क्रांति का स्वप्न: अखिल भारतीय दलित महिला सम्मेलन
प्रेम के स्टीरियोटाइप से मुक्ति ही प्रेम है
खैरलांजी के एक दशक के बाद भी बदस्तूर जारी है शोषण….
‘सावित्री बाई फुले वैचारिकी सम्मान’ (तृतीय) के लिए आवेदन / संस्तुतियां आमंत्रित
सत्ता के उच्च पदों पर जातिवादी और सांप्रदायिक मनोवृति के लोगआसीन हैं: तीस्ता सीतलवाड़
ऐतिहासिक और अमिट है समाजवाद की वैचारिक धारा वरसी जी स्मृति समारोह में वक्ताओं की राय