गैंगस्टर माँ का साया और एक आज़ाद बेटी की परवाज़
परायों की गली में नितांत अकेला कुशवाहा सम्राट (चौधरी) !
प्रतीकों की लड़ाई: महिष दसरा, वर्चस्व का इतिहास और सत्ता का मौन
फिल्मों में स्त्री-भूमिका के प्रश्न “भूमिका” फ़िल्म के सन्दर्भ में
फैंसी स्त्रीवादी आयोजनों में जाति मुद्दों की उपेक्षा
महिला मताधिकार के राजनीतिक संदेश
स्त्री-सत्ता : यथार्थ या विभ्रम
मनुवादी न्याय का शीर्ष तंत्र
दिमाग पर निष्क्रिय होने की चोट उसे निष्क्रिय बनाकर ही छोड्ती है
पितृसत्तात्मक समाज का शिकार पुरुष तथा स्त्रीवादी मुक्ति अभियान
डॉ. अम्बेडकर का मूल चिंतन है स्त्री चिंतन
न्यायपालिका में मौजूद जातिवादी मानसिकता – अरविंद जैन
ऐतिहासिक और अमिट है समाजवाद की वैचारिक धारा वरसी जी स्मृति समारोह में वक्ताओं की राय