गैंगस्टर माँ का साया और एक आज़ाद बेटी की परवाज़
परायों की गली में नितांत अकेला कुशवाहा सम्राट (चौधरी) !
प्रतीकों की लड़ाई: महिष दसरा, वर्चस्व का इतिहास और सत्ता का मौन
फिल्मों में स्त्री-भूमिका के प्रश्न “भूमिका” फ़िल्म के सन्दर्भ में
मेरा एक सपना है ! (मार्टिन लूथर किंग का उद्बोधन,1963)
दिग्गज स्त्रीवादी समानांतर सिनेमा की एक बड़ी सख्सियत कल्पना लाजमी का निधन !
रंगमंच में हाशिये की सशक्त आवाज़ है ईश्वर शून्य का रंगकर्म
पढ़ी-लिखी चुड़ैल: ‘स्त्री’!
स्वराजशाला: राजनीति की रंगशाला
धरती का महारस और प्रेम की आधुनिकता : गुलज़ार के फिल्मी गीतों में लौकिकता, आत्म और असीम का अंतर्संबंध
‘डेंजर चमार’ की गायिका गिन्नी माही का प्रतिरोधी स्वर : हमारी जान इतनी सस्ती क्यों है, गाँव से बाहर हमारी बस्ती क्यों है...
‘आज के दौर में तटस्थता असांस्कृतिक और अभारतीय हैः अशोक वाजपेयी’
ऐतिहासिक और अमिट है समाजवाद की वैचारिक धारा वरसी जी स्मृति समारोह में वक्ताओं की राय