फ़िलिस्तीन : एक नया कर्बला – नासिरा शर्मा
पूर्ण लोकतंत्र की स्थापना : एक किताब,एक पहल
बच्चों की क़त्लगाह ग़ाज़ा पट्टी
लेखक संगठनों को समावेशी बनाने के सुझाव के साथ आगे आये लेखक: प्रलेस से की पहल की मांग
जब प्रलेस के बड़े लेखकों ने पाकिस्तानी महिलाओं से बदसुलूकी की
लेखिका ने गिनाये प्रगतिशील लेखक संघ के महिला विरोधी निर्णय: संघ सेक्सिस्ट पुलिसवाले के आगे नतमस्क
‘स्त्री’ : एक सार्थक हॉरर फिल्म
मिसोजिनी, नायकत्व और ‘कबीर सिंह’
एक युवा फिल्मकार की दस्तक: मंजिलें अभी शेष है!
मेरा एक सपना है ! (मार्टिन लूथर किंग का उद्बोधन,1963)
दिग्गज स्त्रीवादी समानांतर सिनेमा की एक बड़ी सख्सियत कल्पना लाजमी का निधन !
दोहरी सियासत का शिकार फ़िलिस्तीन