गैंगस्टर माँ का साया और एक आज़ाद बेटी की परवाज़
परायों की गली में नितांत अकेला कुशवाहा सम्राट (चौधरी) !
प्रतीकों की लड़ाई: महिष दसरा, वर्चस्व का इतिहास और सत्ता का मौन
फिल्मों में स्त्री-भूमिका के प्रश्न “भूमिका” फ़िल्म के सन्दर्भ में
आये तुम इस धरती पर बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय !
बहस में डाक्यूमेंट्री
स्त्री के रंगों की दुनिया
कला, धर्म, बाजार और स्त्री का द्वंद्व है रंग रसिया
प्रतिरोध का सिनेमा उत्सव भी है ,और आंदोलन भी
जोहरा आपा तुम्हें लाल सलाम!
सांस्कृतिक ढकोसलों पर कुठाराघात करती फिल्म : ‘ क्वीन ‘
ऐतिहासिक और अमिट है समाजवाद की वैचारिक धारा वरसी जी स्मृति समारोह में वक्ताओं की राय