गैंगस्टर माँ का साया और एक आज़ाद बेटी की परवाज़
परायों की गली में नितांत अकेला कुशवाहा सम्राट (चौधरी) !
प्रतीकों की लड़ाई: महिष दसरा, वर्चस्व का इतिहास और सत्ता का मौन
फिल्मों में स्त्री-भूमिका के प्रश्न “भूमिका” फ़िल्म के सन्दर्भ में
समाज का नजरिया बदलने वाली फोटोग्राफर संगीता महाजन
पारदर्शी अधोवस्त्र में कास्टिंग का आमंत्रण: मर्दवादी कुंठा या स्त्री सेक्सुअलिटी का प्रतीक?
थियेटर ऑफ रेलेवेंस – स्वराजशाला
जातिरूढ़ सास ‘अनारो’ की भूमिका में मैं अपनी सास को कॉपी कर रही हूँ
यौन सुख पर अपना दावा ठोंकने वाली महिलाओं की कहानी है – लस्ट स्टोरीज़
कान फिल्म महोत्सव में मेरी बेटी (बेटी की शिखर-यात्रा माँ की नजर में)
इन बिटवीन द एलिमेण्ट्स ऑफ़ पेण्टिंग, द बॉडी एंड द स्पेस (जयपुर में नवीन कलात्मक आगाज)
कल्पना पटोवारी द्वारा गाया गया और नवल कुमार द्वारा लिखित गीत कॉमनवेल्थ गेम्स में गूंजेगा
ऐतिहासिक और अमिट है समाजवाद की वैचारिक धारा वरसी जी स्मृति समारोह में वक्ताओं की राय