लोक से विश्व तक गूंजती छत्तीसगढ़ की धड़कन अब खामोश: तीजन बाई
रीतिकालीन कविता और स्त्री यौनिकता विमर्श
हँसना है तो थोड़ा रो लें: मैं वापस आऊंगा’
“भक्तिकालीन हिंदी साहित्य में स्त्री-अस्मिता कीअभिव्यक्ति : एक आलोचनात्मक अध्ययन”
‘बरजी मैं काही की नाहिं रहूं’ — मीराबाई : हिंदी की पहली स्त्रीवादी : पहली क़िस्त
अकथनीय का कथन – एक औरत की नोटबुक
दलित स्त्रीवाद : स्त्रीवाद और दलितवाद का विकास
देह बनाम मन की स्वतंत्रता की कहानियाँ
हवा सी बेचैन युवतियां ‘दलित स्त्रीवाद की कविताएं’
सखी तुम्हारा जाना मलय पवन का दह जाना है
एक स्त्री रचनाकार की यात्रा
जीवन -अनुभवों का सफ़र कहानी तक
सूखा नशा