लोक से विश्व तक गूंजती छत्तीसगढ़ की धड़कन अब खामोश: तीजन बाई
रीतिकालीन कविता और स्त्री यौनिकता विमर्श
हँसना है तो थोड़ा रो लें: मैं वापस आऊंगा’
“भक्तिकालीन हिंदी साहित्य में स्त्री-अस्मिता कीअभिव्यक्ति : एक आलोचनात्मक अध्ययन”
वेद निरर्थक ध्वनियां मात्र
जातिवादी जड़ताओं के बरक्स एक प्रेम कहानी : पीली छतरी वाली लडकी
स्त्री का समाज और समाज में स्त्री‘अकेली’
‘मध्यरात्रि के बीच’ और अन्य कविताएं ( कवयित्री इला कुमार)
तो देख्यो है घूंघट पट खोल- मीराबाई : हिन्दी की पहली स्त्रीवादी : आख़िरी क़िस्त
कोठागोई : किस्सों का अपना चुनाव
‘तेरा कोई नहीं रोकणहारा, मगन होय मीरा चली’-मीराबाई : हिंदी की पहली स्त्रीवादी : तीसरी क़िस्त
माई मैं तो लियो है सांवरिया मोल’ — मीराबाई : हिंदी की पहली स्त्रीवादी : दूसरी क़िस्त
सूखा नशा