लोक से विश्व तक गूंजती छत्तीसगढ़ की धड़कन अब खामोश: तीजन बाई
रीतिकालीन कविता और स्त्री यौनिकता विमर्श
हँसना है तो थोड़ा रो लें: मैं वापस आऊंगा’
“भक्तिकालीन हिंदी साहित्य में स्त्री-अस्मिता कीअभिव्यक्ति : एक आलोचनात्मक अध्ययन”
पीड़ाजन्य अनुभव और डा आंबेडकर का स्त्रीवाद
औरतें – क़िस्त चौथी ( स्पैनिश कहानियां )
1990 के बाद का हिंदी समाज और अद्विज हिंदी लेखन
सुनंदा का दरवाजा
देखो-देखो ‘चमईया’ हमार सुतुही
औरतें – क़िस्त तीन ( स्पैनिश कहानियां )
नदिया के तीरे-तीरे
“चकरघिन्नी” : तीन तलाक़ का दु:स्वप्न
सूखा नशा