लोक से विश्व तक गूंजती छत्तीसगढ़ की धड़कन अब खामोश: तीजन बाई
रीतिकालीन कविता और स्त्री यौनिकता विमर्श
हँसना है तो थोड़ा रो लें: मैं वापस आऊंगा’
“भक्तिकालीन हिंदी साहित्य में स्त्री-अस्मिता कीअभिव्यक्ति : एक आलोचनात्मक अध्ययन”
बिहार और जातिवाद का इतिहास ‘दिनकर’ की कलम से:
उपासना झा की कवितायें
सुधार नहीं पूर्ण बदलाव चाहेंगी महिलायें
स्तन कैंसर/ब्रेस्ट कैंसर: कवितायें विभा रानी की
स्वयं सिद्धा !
तुम्हें बदलना ही होगा: उपन्यास में विमर्श
जयभीम वाला दूल्हा चाहिए
स्त्रीविमर्श में जाति, वर्ग और धार्मिक पहचान की महत्वपूर्ण भूमिका होनी चाहिए : नमिता सिंह
सूखा नशा