लोक से विश्व तक गूंजती छत्तीसगढ़ की धड़कन अब खामोश: तीजन बाई
रीतिकालीन कविता और स्त्री यौनिकता विमर्श
हँसना है तो थोड़ा रो लें: मैं वापस आऊंगा’
“भक्तिकालीन हिंदी साहित्य में स्त्री-अस्मिता कीअभिव्यक्ति : एक आलोचनात्मक अध्ययन”
स्त्री के सम्मान में पढ़ा गया फातिहा:‘काला जल’ (पहली क़िस्त)
झाँकती है देह आँखों के पार और अन्य कविताएं
‘अन्तरजातीय विवाह से ही सामाजिक विषमता खत्म होगी’
वीरू सोनकर की कविताएँ
महिला अधिकार के क्षेत्र में पंडिता रमाबाई स्त्रीकाल सम्मान
अंजना वर्मा की कविताएँ
पितृसत्तात्मक दृष्टिकोण और स्त्री की आजादी विशेष संदर्भ-मैत्रेयी की कहानी “पगला गयी है भागवती”
स्वर्णलता ठन्ना की कविताएँ
सूखा नशा