लोक से विश्व तक गूंजती छत्तीसगढ़ की धड़कन अब खामोश: तीजन बाई
रीतिकालीन कविता और स्त्री यौनिकता विमर्श
हँसना है तो थोड़ा रो लें: मैं वापस आऊंगा’
“भक्तिकालीन हिंदी साहित्य में स्त्री-अस्मिता कीअभिव्यक्ति : एक आलोचनात्मक अध्ययन”
वक्रता का वाग्वैदग्ध्य : नागार्जुन की स्त्री केन्द्रित कवितायें
उस देश में और अन्य कविताएं
शैलजा की कविताएं
बोलिए न पापा कुछ तो बोलिए
दो चोटी वाली लड़की और अन्य कविताएं
सुनो आवारा लड़कियों और अन्य कविताएं
महिलाओं , महान बनने के सपने देखो: डा.आंबेडकर
देह दोहन का अधिकार! उर्फ ‘दास्ताने लापता’ : ( दूसरी क़िस्त कालाजल )
सूखा नशा