लोक से विश्व तक गूंजती छत्तीसगढ़ की धड़कन अब खामोश: तीजन बाई
रीतिकालीन कविता और स्त्री यौनिकता विमर्श
हँसना है तो थोड़ा रो लें: मैं वापस आऊंगा’
“भक्तिकालीन हिंदी साहित्य में स्त्री-अस्मिता कीअभिव्यक्ति : एक आलोचनात्मक अध्ययन”
राजकमल चौधरी के उपन्यास और सेक्सुएलिटी
नागार्जुन के उपन्यासों की दलित पक्षधरता
नागार्जुन के उपन्यासों में स्त्री
हिंदी साहित्य में आदिवासी स्त्री का सवाल
डाॅ. उतिमा केशरी की कविताएं
कल्याणी ठाकुर चरल: बंगाल का दलित स्वर
रण में सामाजिक सक्रियता की मिसाल हैं पंक्ति जोग
रूपा सिंह की कविताएँ
सूखा नशा