लोक से विश्व तक गूंजती छत्तीसगढ़ की धड़कन अब खामोश: तीजन बाई
रीतिकालीन कविता और स्त्री यौनिकता विमर्श
हँसना है तो थोड़ा रो लें: मैं वापस आऊंगा’
“भक्तिकालीन हिंदी साहित्य में स्त्री-अस्मिता कीअभिव्यक्ति : एक आलोचनात्मक अध्ययन”
बहन भी तो मेट्रो ले रही होगी इस वक्त
छुई-मुई
जायसी और पद्माकर की नायिकाओं के व्यक्तित्व के सामाजिक पक्ष का तुलनात्मक अध्ययन
सत्ता और विमर्श के अन्तर्सम्बन्धों की रवायत (चित्रा मुद्गल की कहानियों का पुनराकलन)
बिना इजाज़त अन्दर आना मना है
संतोष अर्श की कविताएं : स्त्री
ऑब्जेक्ट से सब्जेक्ट बनने की जद्दोजहद
हिंदी साहित्य से झाँकतीं आदिवासी स्त्रियाँ
सूखा नशा