गैंगस्टर माँ का साया और एक आज़ाद बेटी की परवाज़
परायों की गली में नितांत अकेला कुशवाहा सम्राट (चौधरी) !
प्रतीकों की लड़ाई: महिष दसरा, वर्चस्व का इतिहास और सत्ता का मौन
फिल्मों में स्त्री-भूमिका के प्रश्न “भूमिका” फ़िल्म के सन्दर्भ में
कल्याणी ठाकुर चरल: बंगाल का दलित स्वर
पितृसत्ता के बदलते स्वरूप
अनारकली आरावाली 24 मार्च से
बस्तर- आईजी ने महिला सामाजिक कार्यकर्ताओं को दी गाली
बलात्कार के विरोध में आवाज बनी बेला भाटिया को मिली घर छोड़ने की धमकी
कभी सूख नहीं पायेंगे रोहित वेमुला की माँ के आंसू
घरेलू कामगार महिलाओं की दीदी: संगीता सुभाषिणी
पुस्तक मेले की 'मानुषी' से गायब गैरद्विज स्त्री
ऐतिहासिक और अमिट है समाजवाद की वैचारिक धारा वरसी जी स्मृति समारोह में वक्ताओं की राय