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‘द सेकंड सोच’: कटी हुई जुबानों के बीच सच का परचम

मीरा के पदों को तत्कालीन रूढ़िग्रस्त समाज से मिले अनादर और कड़वे बोलों ने मधुर बना दिया। जितनी गहरी वेदना एवं पीड़ा, उतनी ही...

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शिवम् अवस्थी की कविताएँ और ग़ज़ल

1.तुम बताओ...मौन के इन मोतियों में, गूँजते हैं साज़ कितने?इन झुकी सी पलकों के, अक्स में परवाज़ कितने?तुम बताओ हैं तुम्हारी, ज़िंदगी में स्वप्न...

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शिवम् अवस्थी की कविताएँ और ग़ज़ल

1.तुम बताओ...मौन के इन मोतियों में, गूँजते हैं साज़ कितने?इन झुकी सी पलकों के, अक्स में परवाज़ कितने?तुम बताओ हैं तुम्हारी, ज़िंदगी में स्वप्न...
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शिवम् अवस्थी की कविताएँ और ग़ज़ल

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फ़िलिस्तीन : एक नया कर्बला – नासिरा शर्मा

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पूर्ण लोकतंत्र की स्थापना : एक किताब,एक पहल

इंजीनियर ललन कुमार की 'किताब पूर्ण लोकतंत्र की स्थापना' के विमोचन के अवसर पर भारत में डायवर्सिटी के प्रवक्ता एच एल दुसाध का अध्यक्षीय...

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