लोक से विश्व तक गूंजती छत्तीसगढ़ की धड़कन अब खामोश: तीजन बाई
रीतिकालीन कविता और स्त्री यौनिकता विमर्श
हँसना है तो थोड़ा रो लें: मैं वापस आऊंगा’
“भक्तिकालीन हिंदी साहित्य में स्त्री-अस्मिता कीअभिव्यक्ति : एक आलोचनात्मक अध्ययन”
स्त्री – संस्कृति का हरकारा : यू आर अनंतमूर्ती
प्रियंका सिंह की कवितायें
तुम आए हो ना शब -ए-इंतज़ार गुज़री है …….
झाड़ू
इस दुनिया से परे आख़िर है क्या
नगाड़े की तरह बजते है शब्द
स्त्री एवं भाषा : तीसरी परम्परा की खोज एवं वैकल्पिक भाषावैज्ञानिक अध्ययन
कविता विकास की कवितायेँ
सूखा नशा