लोक से विश्व तक गूंजती छत्तीसगढ़ की धड़कन अब खामोश: तीजन बाई
रीतिकालीन कविता और स्त्री यौनिकता विमर्श
हँसना है तो थोड़ा रो लें: मैं वापस आऊंगा’
“भक्तिकालीन हिंदी साहित्य में स्त्री-अस्मिता कीअभिव्यक्ति : एक आलोचनात्मक अध्ययन”
कुमार मुकुल की दो कवितायें
चालीस साल की स्त्री : कवितायें और विमर्श
दलित आलोचना अपनी आलोचना बर्दाश्त नहीं करती : प्रोफ . मैनेजर पाण्डेय
हाशिये का हर्फ या वर्चस्ववादी विमर्श !
अरुण देव की कवितायें
अशोक कुमार पाण्डेय की कवितायें
कंचन भारद्वाज की कवितायें
आशा पांडेय ओझा की कवितायें
सूखा नशा