लोक से विश्व तक गूंजती छत्तीसगढ़ की धड़कन अब खामोश: तीजन बाई
रीतिकालीन कविता और स्त्री यौनिकता विमर्श
हँसना है तो थोड़ा रो लें: मैं वापस आऊंगा’
“भक्तिकालीन हिंदी साहित्य में स्त्री-अस्मिता कीअभिव्यक्ति : एक आलोचनात्मक अध्ययन”
एक नई ‘दस्तक’
स्वर्णलता ठन्ना की कवितायें
संजय इंगले तिगांवकर की कवितायें
धीय बिनु धरम न होय….!
नीलिमा सिन्हा की कवितायें : वर्किंग वीमेन और अन्य
वीणा वत्सल सिंह की कवितायें : रेहाना जब्बारी और अन्य
अविनाश मिश्र की चार कवितायें : बदसूरत औरत की जरूरत और अन्य
महिलाएँ-जाति, वर्ग या एक उत्पीड़ित लिंग
सूखा नशा