लोक से विश्व तक गूंजती छत्तीसगढ़ की धड़कन अब खामोश: तीजन बाई
रीतिकालीन कविता और स्त्री यौनिकता विमर्श
हँसना है तो थोड़ा रो लें: मैं वापस आऊंगा’
“भक्तिकालीन हिंदी साहित्य में स्त्री-अस्मिता कीअभिव्यक्ति : एक आलोचनात्मक अध्ययन”
अपराधबोध और हीनभावना से रहित होना ही मेरी समझ में स्त्री की शुचिता है
अमानवीय और क्रूर प्रथायें स्त्री को अशक्त और गुलाम बनाने की कवायद हैं
वह हमेशा रहस्यमयी आख्यायित की गयी
जो वैध व कानूनी है वह पुरुष का ……..
उज्जवल भट्टाचार्य की कवितायें : ब्रह्मज्ञान व अन्य
सच्चे अर्थों मे जनकवि थे नामदेव ढसाल
किले में समंदर : आखिरी किस्त
किले में समंदर : पहली क़िस्त
सूखा नशा