लोक से विश्व तक गूंजती छत्तीसगढ़ की धड़कन अब खामोश: तीजन बाई
रीतिकालीन कविता और स्त्री यौनिकता विमर्श
हँसना है तो थोड़ा रो लें: मैं वापस आऊंगा’
“भक्तिकालीन हिंदी साहित्य में स्त्री-अस्मिता कीअभिव्यक्ति : एक आलोचनात्मक अध्ययन”
सरोज की डायरी के कुछ पन्ने
उषा प्रियंवदा की कहानियों में स्त्री-अस्मिता का प्रश्न
मौत तक जाने का रास्ता खुद बनाया पहले उसने
जाति, जेंडर और क्लास दलित स्त्रीवाद की धूरि
सुनो चारुशीला और अन्य कवितायें
बहन का प्रेमी: पांच कविताएं
दो पीढी तीन कवितायें
बिल्किस … तुम कहाॅं हो …. ?
सूखा नशा