फ़िलिस्तीन : एक नया कर्बला – नासिरा शर्मा
पूर्ण लोकतंत्र की स्थापना : एक किताब,एक पहल
बच्चों की क़त्लगाह ग़ाज़ा पट्टी
स्वयं में असाधारण स्त्री : माया एंजलो
जेंडर और जाति के कुंडलों को तोडता लेखन और सत्ता की कुर्सी
बदरूहें हवा में चिरागों की तरह उड़ रही हैं
पुंसवादी आलोचना के खतरे और महादेवी वर्मा
अरूणा शानबाग – आखिर कब तक???
हव्वा की बेटी : उपन्यास अंश, भाग 2
स्त्री आत्मकथा – अस्मिता संघर्ष तथा आत्मनिर्भर स्त्री
हव्वा की बेटी: उपन्यास अंश
दोहरी सियासत का शिकार फ़िलिस्तीन