लोक से विश्व तक गूंजती छत्तीसगढ़ की धड़कन अब खामोश: तीजन बाई
रीतिकालीन कविता और स्त्री यौनिकता विमर्श
हँसना है तो थोड़ा रो लें: मैं वापस आऊंगा’
“भक्तिकालीन हिंदी साहित्य में स्त्री-अस्मिता कीअभिव्यक्ति : एक आलोचनात्मक अध्ययन”
आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी: ‘चिड़िया भी तुम्हारी, पिंजरा भी तुम्हारा’
स्त्री-विमर्श के ‘महोत्सव’
ज्वलंत स्त्री-समस्या पर कविताई
संजू शब्दिता की गजलें
एक खत पागलखाने से और अन्य कवितायें
वारेन हेस्टिंग्स का साँँड: उत्तर औपनिवेशिक समय का ऐतिहासिक पाठ
मालिनी अवस्थी का गीत और मोतीझील का किस्सा
हिन्दी साहित्य में महिलाओं को अब तक समानता नहीं मिली है : उषा किरण खान
सूखा नशा