लोक से विश्व तक गूंजती छत्तीसगढ़ की धड़कन अब खामोश: तीजन बाई
रीतिकालीन कविता और स्त्री यौनिकता विमर्श
हँसना है तो थोड़ा रो लें: मैं वापस आऊंगा’
“भक्तिकालीन हिंदी साहित्य में स्त्री-अस्मिता कीअभिव्यक्ति : एक आलोचनात्मक अध्ययन”
अनीता चौधरी की कविताएँ
नताशा की कविताएँ
और शहर का किताब हो जाना इश्क़ में…
अंतर्वेदना के दंश
‘‘अनाघ्रातम पुष्पम, असूर्यंपश्या से रमणेषु रम्भा तक’’
आपहुदरी का लोकार्पण
‘दलित साहित्य : एक अन्तर्यात्रा’
पेंडुलम
सूखा नशा