लोक से विश्व तक गूंजती छत्तीसगढ़ की धड़कन अब खामोश: तीजन बाई
रीतिकालीन कविता और स्त्री यौनिकता विमर्श
हँसना है तो थोड़ा रो लें: मैं वापस आऊंगा’
“भक्तिकालीन हिंदी साहित्य में स्त्री-अस्मिता कीअभिव्यक्ति : एक आलोचनात्मक अध्ययन”
जाति पर डाका : हिंदी साहित्य में जातिविमर्श
हाँ, मैं एक स्त्री हूँ
मुझसे पहली सी मुहब्बत मेरे महबूब न मांग
मैं अपनी पीढ़ियों में कायम हूँ, मैं इरोम हूँ
औरतें – क़िस्त दो
शुभम श्री की पुरस्कृत और अन्य कविताएं : स्त्रीकाल व्हाट्सअप ग्रूप की टिप्पणियाँ
दास्तान ए सोती सुंदरी वाया परीदेश की राजकुमारियां
प्रत्यूष चन्द्र मिश्रा की कवितायें
सूखा नशा