लोक से विश्व तक गूंजती छत्तीसगढ़ की धड़कन अब खामोश: तीजन बाई
रीतिकालीन कविता और स्त्री यौनिकता विमर्श
हँसना है तो थोड़ा रो लें: मैं वापस आऊंगा’
“भक्तिकालीन हिंदी साहित्य में स्त्री-अस्मिता कीअभिव्यक्ति : एक आलोचनात्मक अध्ययन”
जेंडर-स्वतन्त्रता के नाम एक “कवितामय” शाम
आदिवासी लेखिकाओं ने की आदिवासी महिलाओं के खिलाफ लेखन की निंदा लेकिन लेखन पर प्रतिबंध के पक्ष में नहीं
जिंदगी की ओर लौटते हुए…
तुम और अन्य कविताएँ
ये न थी हमारी किस्मत
प्रेम कथा में हाड़ा रानी की पुनर्वापसी बनाम बैताल का अनुत्तरित प्रश्न
नृत्यमय जगत और अन्य कविताएँ
अनचिन्हा कोलाज़….स्वरांगी साने की कविताएँ
सूखा नशा