लोक से विश्व तक गूंजती छत्तीसगढ़ की धड़कन अब खामोश: तीजन बाई
रीतिकालीन कविता और स्त्री यौनिकता विमर्श
हँसना है तो थोड़ा रो लें: मैं वापस आऊंगा’
“भक्तिकालीन हिंदी साहित्य में स्त्री-अस्मिता कीअभिव्यक्ति : एक आलोचनात्मक अध्ययन”
हम सब को स्त्रीवादी होना चाहिए
नीरजा हेमेन्द्र की कविताएं ( स्त्री होना और अन्य)
आत्मकथा नहीं चयनित छविनिर्माण कथा (!)
पवन करण की कवितायें (तुम जैसी चाहते हो वैसी नही हूं मैं और अन्य)
रानी बेटी
रमणिका फाउण्डेशन का मासिक रचना मंच: हीरालाल राजस्थानी, अनिल गंगल और रानी कुमारी का रचना-पाठ
घृणित विचारों और कृत्यों वाले पत्रकार की आत्मप्रशस्ति है यह, आत्मभंजन नहीं मिस्टर जोशी
आप मिट्टी की तरह बने थे…
सूखा नशा