लोक से विश्व तक गूंजती छत्तीसगढ़ की धड़कन अब खामोश: तीजन बाई
रीतिकालीन कविता और स्त्री यौनिकता विमर्श
हँसना है तो थोड़ा रो लें: मैं वापस आऊंगा’
“भक्तिकालीन हिंदी साहित्य में स्त्री-अस्मिता कीअभिव्यक्ति : एक आलोचनात्मक अध्ययन”
भिखारी ठाकुर की तुलना शेक्सपियर से करना भिखारी ठाकुर का अपमान है
मुन्नी गुप्ता की कविताएं ( प्रेतछाया और रोटी का सवाल व अन्य)
तीस घटा पाँच बराबर आज़ाद और मुकद्दस औरत (पतनशील पत्नियों के नोट्स से)
सत्यप्रकाश की कविताएं (शब्द व अन्य)
सिर्फ चीत्कार और उच्छ्वास ही लेखन नहीं है: ममता कालिया
राकेश श्रीमाल की कविताएँ
घेराबंदी (अरविंद जैन की कहानी)
‘यौन हिंसा के सन्दर्भ में लज्जित करने की रणनीति’ (यशपाल के झूठा-सच में)
सूखा नशा