फ़िलिस्तीन : एक नया कर्बला – नासिरा शर्मा
पूर्ण लोकतंत्र की स्थापना : एक किताब,एक पहल
बच्चों की क़त्लगाह ग़ाज़ा पट्टी
‘दीवार में एक खिड़की रहती थी’ उपन्यास में प्रकृति चित्रण
राष्ट्रवाद, विश्वविद्यालय और टैंक: संदीप मील की कहानी
पिंजरे की तीलियों से बाहर आती मैना की कुहुक
बेड़ियाँ: अरविंद जैन की कहानी
क्रूर और हिंसक यथार्थ में प्रेम और करुणा को बचाये रखने की कोशिश है समकालीन स्त्री- कविता
भिखारी ठाकुर की तुलना शेक्सपियर से करना भिखारी ठाकुर का अपमान है
ललदेद के वाखों में आत्मानुभूति, देह और ज्ञान की लोकमीमांसा : कश्मीरी शैव दर्शन, स्त्री-अनुभव और सांस्कृतिक चेतना का सैद्धांतिक पुनर्पाठ
मुन्नी गुप्ता की कविताएं ( प्रेतछाया और रोटी का सवाल व अन्य)
दोहरी सियासत का शिकार फ़िलिस्तीन