लोक से विश्व तक गूंजती छत्तीसगढ़ की धड़कन अब खामोश: तीजन बाई
रीतिकालीन कविता और स्त्री यौनिकता विमर्श
हँसना है तो थोड़ा रो लें: मैं वापस आऊंगा’
“भक्तिकालीन हिंदी साहित्य में स्त्री-अस्मिता कीअभिव्यक्ति : एक आलोचनात्मक अध्ययन”
हव्वा की बेटियों का ख़्वाब है ‘दूसरी जन्नत’/नासिरा शर्मा
आए बड़े पढ़े-लिखे इंसाफ़ज़ादे व अन्य कविताएं (कवयित्री: वीना)
वे सख्त दिल मह्बूब: सफ़र के क़िस्से
औरतें उठी नहीं तो जुल्म बढ़ता जायेगा (भारती वत्स) की कविताएं
भारतेन्दु हरिश्चंद्र की पत्रकारिता और स्त्री-मुक्ति के प्रश्न
‘लिखो इसलिए’ व श्रीदेवी की अन्य कविताएं
मैं अमर बेल को गाली नहीं देता और अन्य कविताएं (कवि:एस एस पंवार)
“केदारनाथ सिंह की कविताओं में स्त्री”
सूखा नशा