रीतिकालीन कविता और स्त्री यौनिकता विमर्श
हँसना है तो थोड़ा रो लें: मैं वापस आऊंगा’
“भक्तिकालीन हिंदी साहित्य में स्त्री-अस्मिता कीअभिव्यक्ति : एक आलोचनात्मक अध्ययन”
सूखा नशा
बच्चों को रोटी, कपड़ा, दवा और पढाई नहीं दे पाने वाला समाज सिर्फ सजा देने के लिए उतावला है
इंसाफ अधूरा है
जुंको फुरुता: जिसे याद रखना ही होगा
मगध में छठ : स्त्रीवादी पाठ
पहले बाबरी , फिर दादरी , फिर हिन्दुत्व के नाम पर बहादुरी
“मोर्चे पर कवि” / राजा रोज कुरते बदलता है/लेकिन राजा नंगा है
लोकआस्था और श्रमण परम्परा की अदम्य जिजीविषा का आख्यान
सुनपेड़ हत्या कांड : तथ्य और प्रतिबद्धता
नाच एक संवेदनशील उपन्यास