दोहरी सियासत का शिकार फ़िलिस्तीन
“श्वेत पर्दे पर श्याम और उनकी ‘सुसमन ’ (The Essence)
पोस्ट ट्रुथ के दौर में युवाओं (जेन Z) के आंदोलन : कुछ सवाल, कुछ जवाब
सतीश सरदाना का कहानी-संग्रह ‘चोखा दाम’ मनुष्य, बाज़ार और स्मृति
जुंको फुरुता: जिसे याद रखना ही होगा
मगध में छठ : स्त्रीवादी पाठ
पहले बाबरी , फिर दादरी , फिर हिन्दुत्व के नाम पर बहादुरी
“मोर्चे पर कवि” / राजा रोज कुरते बदलता है/लेकिन राजा नंगा है
लोकआस्था और श्रमण परम्परा की अदम्य जिजीविषा का आख्यान
सुनपेड़ हत्या कांड : तथ्य और प्रतिबद्धता
औरत , विज्ञापन और बाजार
प्यार पर न चढाओ हैवानियत की चादर
‘प्रगतिशील सिनेमा’ प्रेमचंद का अधूरा सपना