रीतिकालीन कविता और स्त्री यौनिकता विमर्श
हँसना है तो थोड़ा रो लें: मैं वापस आऊंगा’
“भक्तिकालीन हिंदी साहित्य में स्त्री-अस्मिता कीअभिव्यक्ति : एक आलोचनात्मक अध्ययन”
सूखा नशा
औरत , विज्ञापन और बाजार
प्यार पर न चढाओ हैवानियत की चादर
सामूहिक बलात्कारः स्त्री-चेतना और अस्मिता को हतोत्साहित करने का षड्यंत्रकारी आयोजन
मेरे ख़्वाबों के दूल्हे बनाम शहनाइयां जो बज न सकीं
‘परमाणु ऊर्जा का नकार’ स्त्रियों के लिये इतना मह्त्वपूर्ण क्यों है ?
कंडोम , सनी लियोन और अतुल अंजान की मर्दवादी चिंता
औरत को डायन और पागल ठहराने के पीछे
मातृत्व और पितृसत्ता
नाच एक संवेदनशील उपन्यास