रीतिकालीन कविता और स्त्री यौनिकता विमर्श
हँसना है तो थोड़ा रो लें: मैं वापस आऊंगा’
“भक्तिकालीन हिंदी साहित्य में स्त्री-अस्मिता कीअभिव्यक्ति : एक आलोचनात्मक अध्ययन”
सूखा नशा
होली का स्त्रीवादी पाठ
नंदलाला के लिए होली और गोपियों के लिए गाली : होली के बहाने स्त्रियों की यौनिकता पर प्रहार
मैं हिजड़ा… मैं लक्ष्मी
वीरांगना होलिका मूल निवासी थी , क्यों मनायें हम उनकी ह्त्या का जश्न
विज्ञान के क्षेत्र में लडकियां क्यों कम हैं ?
अनफेयर एंड लवली : गोरेपन की सनक का जवाब
पवित्र आराधना स्थल और अपवित्र महिलाएं
क्या मैं अंदर आ सकती हूं , भगवन् !
नाच एक संवेदनशील उपन्यास