पूर्ण लोकतंत्र की स्थापना के विमोचन समारोह
बच्चों की क़त्लगाह ग़ाज़ा पट्टी
दोहरी सियासत का शिकार फ़िलिस्तीन
“श्वेत पर्दे पर श्याम और उनकी ‘सुसमन ’ (The Essence)
आंबेडकरी गीतों में रमाबाई और भीमराव आंबेडकर : चौथी क़िस्त
वर्जिनिटी का नहीं है सवाल … सवाल ना का है . !
जाघों से परे ‘पार्च्ड’ की कहानी: योनि नहीं है रे नारी, वह भी मानवी प्रतिष्ठित
पिंक के बहाने ‘अच्छी औरतें’ और ‘बुरी औरतें’
नये हिंदी सिनेमा में नयी स्त्री
द्रौपदी ! भारतीय सेना बलात्कारी नहीं,राष्ट्रवादी है (?!)
‘पिंक’एक आज़ाद-ख्याल औरत की नज़र से
मी लार्ड, स्त्रीवाद का रंग ‘पिंक’ है ! कुछ-कुछ (?) लाल और नीला भी
पोस्ट ट्रुथ के दौर में युवाओं (जेन Z) के आंदोलन : कुछ सवाल, कुछ जवाब