रीतिकालीन कविता और स्त्री यौनिकता विमर्श
हँसना है तो थोड़ा रो लें: मैं वापस आऊंगा’
“भक्तिकालीन हिंदी साहित्य में स्त्री-अस्मिता कीअभिव्यक्ति : एक आलोचनात्मक अध्ययन”
सूखा नशा
मैं स्त्रीवादी नहीं ,मार्क्सवादी हूँ : श्रीलता स्वामीनाथन
अनारकली आरावाली 24 मार्च से
छोरा होकै छोरियों से पिट गया?
आंबेडकरी गीतों में रमाबाई और भीमराव आंबेडकर : चौथी क़िस्त
वर्जिनिटी का नहीं है सवाल … सवाल ना का है . !
जाघों से परे ‘पार्च्ड’ की कहानी: योनि नहीं है रे नारी, वह भी मानवी प्रतिष्ठित
पिंक के बहाने ‘अच्छी औरतें’ और ‘बुरी औरतें’
नये हिंदी सिनेमा में नयी स्त्री
नाच एक संवेदनशील उपन्यास