दोहरी सियासत का शिकार फ़िलिस्तीन
“श्वेत पर्दे पर श्याम और उनकी ‘सुसमन ’ (The Essence)
पोस्ट ट्रुथ के दौर में युवाओं (जेन Z) के आंदोलन : कुछ सवाल, कुछ जवाब
सतीश सरदाना का कहानी-संग्रह ‘चोखा दाम’ मनुष्य, बाज़ार और स्मृति
‘पार्च्ड’ के जवाब , ‘पिंक’ से कुछ सवाल : स्त्रीवाद के आईने में (!)
रंडी अश्लील शब्द है और फक धार्मिक (!) … पिंक के बहाने कुछ जरूरी सवाल
क्यों स्त्रीविरोधी है अतिनाटकीय फिल्म ‘पिंक’ !
पेंटिंग में माँ को खोजते फ़िदा हुसेन
*‘मिस टनकपुर हाजिर हो’ : यथार्थवादी कॉमेडी
स्त्रियों ने रंगमंच की भाषा और प्रस्तुति को बदला: त्रिपुरारी शर्मा
‘निल बट्टे सन्नाटा’ और घरेलू कामगार महिलायें
बलात्कार पर नजरिया और सलमान खान
‘प्रगतिशील सिनेमा’ प्रेमचंद का अधूरा सपना