दोहरी सियासत का शिकार फ़िलिस्तीन
“श्वेत पर्दे पर श्याम और उनकी ‘सुसमन ’ (The Essence)
पोस्ट ट्रुथ के दौर में युवाओं (जेन Z) के आंदोलन : कुछ सवाल, कुछ जवाब
सतीश सरदाना का कहानी-संग्रह ‘चोखा दाम’ मनुष्य, बाज़ार और स्मृति
कला, धर्म, बाजार और स्त्री का द्वंद्व है रंग रसिया
प्रतिरोध का सिनेमा उत्सव भी है ,और आंदोलन भी
जोहरा आपा तुम्हें लाल सलाम!
सांस्कृतिक ढकोसलों पर कुठाराघात करती फिल्म : ‘ क्वीन ‘
‘प्रगतिशील सिनेमा’ प्रेमचंद का अधूरा सपना