बाबू जगदेव प्रसाद की राजनीति: भाषा, प्रतीक और मुद्दे
शिवम् अवस्थी की कविताएँ और ग़ज़ल
‘द सेकंड सोच’: कटी हुई जुबानों के बीच सच का परचम
फ़िलिस्तीन : एक नया कर्बला – नासिरा शर्मा
परिवारो में असमानता
टूट रही हैं वर्जनाएं: अनेक रिश्तों में होना आखिरी टैबू
संभोग के लिए हिंसक शब्दावली: पितृसत्तात्मक शक्ति संरचना में असामान्य शब्दों का सामान्यीकरण
हां मुझे फर्क पड़ता है…
एको एको जिंदगी, खुल के जिवांगें
महाश्वेता देवी की जंग का फ़ैसला , 25 साल बाद
अमृता प्रीतम की पिंजर: पुरुष पात्र रशीद के अनैतिक से नैतिक बनने के प्रयास की यात्रा
सिक्स पैक सीता