नाच एक संवेदनशील उपन्यास
राहुल गांधी,कांग्रेस की परंपरा और INDIA गठबंधन का असहज भविष्य
भारतीय राजनीति के आधुनिक दधीचि हैं लालू प्रसाद!
ऑब्जेक्टिव प्रश्न से आत्मबोध तक : बाबासाहेब की खोज
नारी अस्मिता के वृत की त्रिज्याएं , चुनौतियां एवं संभावनाएं
मेरे भीतर की स्त्री
छाया कोरेगाँवकर की कविताएं
नागरिकता, समता और अधिकार के संघर्ष अभी जारी हैं
सरोगेसी (विनियमन) विधेयक का बहिष्कारी चरित्र
ट्रोजन की औरतें’ एवं ‘स्त्री विलाप पर्व
बीबीसी में जातिगत भेदभाव (आरोप)
लेखक संगठनों को समावेशी बनाने के सुझाव के साथ आगे आये लेखक: प्रलेस से की पहल की मांग
कवि कभी मरता नहीं, वह अपनी रचनाओं में जीवित रहता है