गैंगस्टर माँ का साया और एक आज़ाद बेटी की परवाज़
परायों की गली में नितांत अकेला कुशवाहा सम्राट (चौधरी) !
प्रतीकों की लड़ाई: महिष दसरा, वर्चस्व का इतिहास और सत्ता का मौन
फिल्मों में स्त्री-भूमिका के प्रश्न “भूमिका” फ़िल्म के सन्दर्भ में
ब्राह्मण होने का दंश: कथित पवित्रता की मकड़जाल
ऑर्गेज़्मिक पैरिटी की चैरिटी बनाम ‘योनि उद्धारक’ बाजार
मेट्रो-किराया-माफ़: मोवलिटी और सुरक्षा की ओर एक कदम
उस संस्थान में ब्राह्मणों की अहमियत थी
हां उनकी नजर में जाति-घृणा थी, वे मेरे दोस्त थे, सहेलियां थीं
केरल के सभी स्कूलों में सेनेटरी नैपकिन वेंडिंग मशीन लगाना अनिवार्य:देश में पहली बार
सांस्थानिक हत्या की सनातन परम्परा: शंबूक से लेकर डा.पायल तक
वे सब ऊंची जाति की हिन्दू सहेलियां थीं: मेरे मुसलमान होने की पीड़ा
ऐतिहासिक और अमिट है समाजवाद की वैचारिक धारा वरसी जी स्मृति समारोह में वक्ताओं की राय