वह राहुल गांधी से प्यार करती है, हथेलियों में रैक्व की आत्मा है
बागमती किनारे बढ़ती प्यास
“पेड़,पानी और प्रतिबद्धता : विजयपुरा की हरियाली की अद्भुत कहानी”
आस्था का सम्मान
सृजन की ताक़त रखने वाली महिलाओं से दुनिया की संस्कृतियाँ क्यों डरती हैं !
महिला विधायक पुरुष विधायकों से विकास करने में 21 ही साबित होती हैं!
औरत मार्च: बदलते पाकिस्तान की दास्तान
भगत सिंह: हवा में रहेगी मेरे ख़यालों की बिजली
हाय मैं हिन्दी पीएचडी, पकोड़े की दुकान भी नहीं खोल सकती
धारा 377 की मौत और पितृसत्तात्मक विमर्श पद्धति
समता की सड़क जोतीबा फुले से होकर गुजरती है.
न मार्क्सवाद, न अंबेडकरवाद, न स्त्रीवाद , बस एक्सपोजर चाहिए और मंच
‘शतरंज’ की बिसात पर सोशल मीडिया ‘के खिलाड़ी’