नाच एक संवेदनशील उपन्यास
राहुल गांधी,कांग्रेस की परंपरा और INDIA गठबंधन का असहज भविष्य
भारतीय राजनीति के आधुनिक दधीचि हैं लालू प्रसाद!
ऑब्जेक्टिव प्रश्न से आत्मबोध तक : बाबासाहेब की खोज
भगत सिंह: हवा में रहेगी मेरे ख़यालों की बिजली
हाय मैं हिन्दी पीएचडी, पकोड़े की दुकान भी नहीं खोल सकती
धारा 377 की मौत और पितृसत्तात्मक विमर्श पद्धति
समता की सड़क जोतीबा फुले से होकर गुजरती है.
न मार्क्सवाद, न अंबेडकरवाद, न स्त्रीवाद , बस एक्सपोजर चाहिए और मंच
तुम्हारी माँ भी छेड़छाड़ की शिकार हुई, बेटों तुम्हें जानना चाहिए औरत की देह पर उसका अपना हक़ होता है
बेपढ़ ऐंकरों द्वारा दलित साहित्य पर हमले की नाकाम कोशिश अर्थात साहित्य आजतक
तानाशाह के खिलाफ वह खूबसूरत शख्सियत, हमें भी पढ़ा गयी पाठ!
कवि कभी मरता नहीं, वह अपनी रचनाओं में जीवित रहता है