गैंगस्टर माँ का साया और एक आज़ाद बेटी की परवाज़
परायों की गली में नितांत अकेला कुशवाहा सम्राट (चौधरी) !
प्रतीकों की लड़ाई: महिष दसरा, वर्चस्व का इतिहास और सत्ता का मौन
फिल्मों में स्त्री-भूमिका के प्रश्न “भूमिका” फ़िल्म के सन्दर्भ में
महिला राजनेताओं की सेक्सुअल ट्रोलिंग को रोक सकती है राजनीतिक जागरूकता
मी लार्ड, यहाँ महिलाओं को न्याय नहीं न्याय का स्वांग मिलता है
बेंगलुरू: धिक्कार है! लड़कियों की संख्या से आपत्ति है!!(लड़कियों के लिए हाई कट ऑफ़ मामला)
किन्नर से अपने बेटे का विवाह कराने वाली एक दिलेर माँ की कहानी, उसी की जुबानी
शक्ति स्वरूपा नहीं मानवी समझने की जरूरत
पिछले पांच सालों में महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़े है: महाराष्ट्र महिला कांग्रेस अध्यक्ष
प्यार के परदे में कैद आज़ादी
अफसोस कि औरतें उठ तो रही हैं पर मर्दवादी संस्थाएं उन्हे कुचल देना चाहती हैं
ऐतिहासिक और अमिट है समाजवाद की वैचारिक धारा वरसी जी स्मृति समारोह में वक्ताओं की राय